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Tuesday, November 20, 2012

शांति की खोज

इन दिनों शर्मा जी काम की पीड़ा से त्रस्त थे. किन्तु ध्यान दीजियेगा: यंहा काम का अर्थ 'काम' नहीं बल्कि कार्य है. वैसे तो काम शर्मा जी का प्रिय कार्य है...भला ये उससे कैसे पीड़ित हो सकते हैं. यदि अभी भी बात आपके पल्ले नहीं पड़ी तो मैं कुछ नहीं कर सकता; हाँ यह सलाह अवश्य दे सकता हूँ की वात्स्यायन कृत कामसूत्र को याद करिए. याद आ गया न? क्या करियेगा इसमें आपका दोष नहीं है; यह तो हमारी मातृभाषा हिंदी की दुर्दशा है. वह दिन दूर नही जब मातृभाषा की ही तरह लोग अपने माँ और बाप को भूल जायेंगे. खैर यंहा इन बातों का कोई औचित्य नहीं है और अलग हम अपने मुद्दे से भटक रहे हैं.