Friday, October 12, 2012

पुस्तक प्रेम

कहा जाता है की शर्मा जी असीम प्रतिभा के धनी हैं. इनकी क्षमता अपरम्पार है. दीगर हो की इन्होने अपने घर का नाम भी कैलाश पर्वत रखा हुआ है. न जाने ये खुद को समझते क्या है. मुझे तो अभी तक समझ नहीं आया. इस ब्लॉग को पड़कर यदि आपको समझ आ जाये तो मुझे ज़रूर बता दीजियेगा. सच कहता हूँ सदैव आपका आभारी रहूँगा.

जैसा की आप जानते हैं शर्मा जी किसी भी प्रकार की फिल्में देख सकतें है. लेकिन इनकी एक और अभिरुचि के बारे में बताना तो भूल ही गया था. इनके अन्दर एक बहुत ही अच्छा गुण है. इन्हें किताबें पढने का शौक है. यह किसी भी प्रकार की किताब पढ़ लेते हैं -- जीवनी, व्यंग, आलोचना, समालोचना, समीक्षा, लघु कथाएँ, उपन्यास, अनुवादित पुस्तकें, रोमांस, कॉमिक्स, बाल चित्रकथा, इत्यादि इत्यादि. पढने के मामले में इनकी स्थिति कुछ वैसी ही है जैसे की अंतोन शेखोव द्वारा लिखित लघु कथा "द बेट" के प्रोतागोनिस्ट की थी जिसने