Showing posts with label personal experience. Show all posts
Showing posts with label personal experience. Show all posts

Wednesday, February 13, 2013

क्या करे शांति? कंहा जाये शांति?



आज कल शांति का भाव काफी बढ़ गया है. बेशकीमती, बहुमूल्य हो गयी है. चाहे जन्हा भी जाईये; ढूंढे नहीं मिलती. यह बहरूपिया भी है और नौटंकी भी. और जो जितने पैसे वाला उसके लिए उतनी ही महंगी. किसी के लिए कुछ और किसी और के लिए और कुछ. चाहे सात सितारा (सेवेन स्टार) होटल हो या कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व, माँ वैष्णव देवी का मंदिर हो या भोले बाबा का डेरा; कंही भी नहीं मिलती. मुझे तो ये समझ नहीं आता की शांति के साथ समस्या क्या है? आखिर शांति आयेगी कैसे? मिलेगी कंहा? क्या बन्दुक की नोक पर आयेगी? तोप के गोले से डर जाएगी? धरना प्रदर्शन से आयेगी? होटलों में सेमिनार और प्रेस कांफ्रेंस करने पर आयेगी? या फिर किसी बाबा जी के हवंन पूजन से खुश होकर हवन कुंड से ही प्रगट हो जाएगी? विगत वर्षों में लोगों ने बहुत उपाय किये हैं -- विदेश यात्रा पर गए, किस्म किस्म के उपासना घर बनवाये, और जाने क्या क्या जुगत लगायी, पर शांति मिल पाई.