कहा जाता है की शर्मा जी असीम प्रतिभा के धनी हैं. इनकी क्षमता अपरम्पार है. दीगर हो की इन्होने अपने घर का नाम भी कैलाश पर्वत रखा हुआ है. न जाने ये खुद को समझते क्या है. मुझे तो अभी तक समझ नहीं आया. इस ब्लॉग को पड़कर यदि आपको समझ आ जाये तो मुझे ज़रूर बता दीजियेगा. सच कहता हूँ सदैव आपका आभारी रहूँगा.
जैसा की आप जानते हैं शर्मा जी किसी भी प्रकार की फिल्में देख सकतें है. लेकिन इनकी एक और अभिरुचि के बारे में बताना तो भूल ही गया था. इनके अन्दर एक बहुत ही अच्छा गुण है. इन्हें किताबें पढने का शौक है. यह किसी भी प्रकार की किताब पढ़ लेते हैं -- जीवनी, व्यंग, आलोचना, समालोचना, समीक्षा, लघु कथाएँ, उपन्यास, अनुवादित पुस्तकें, रोमांस, कॉमिक्स, बाल चित्रकथा, इत्यादि इत्यादि. पढने के मामले में इनकी स्थिति कुछ वैसी ही है जैसे की अंतोन शेखोव द्वारा लिखित लघु कथा "द बेट" के प्रोतागोनिस्ट की थी जिसने
अपने १५ साल के स्वैक्षिक कारावास के आखरी ९ साल किताबें पढ़ते हुई गुजारी थी. जब भी मौका मिला जंहा भी मौका मिला खोल के बैठ गए. इनकी रुचियों का क्षेत्र बहुत व्यापक है. महिलायों की पत्रिका में छपने वाले स्तम्भ "व्यक्तिगत समस्याएं" को बहुत चाव से पढ़ते हैं; मनो उनकी सारी समस्याओं का निदान इनके पास होगा. इन्होने कई लोगों को पढ़ उन्हें विद्वानों की श्रेणी में ला खड़ा किया है; उसमे से प्रमुख है -- तोल्स्तोय, रोंमा रोलां, दुर्खिम, टैगोरे, शरतचंद, प्रेमचंद, नोंम चोमस्की, एरिक होब्स्बौं, नस्सिम निकोलस तालेब, इत्यादि इत्यादि. शायद साइंस फिक्सन और स्कूल के दिनों में अपनी कोर्स बुक के अलावा इन्होने संभवतः हर कुछ पढ़ रखा है.
हाल ही के दिनों में शर्मा जी ने ऑनलाइन शौपिंग के द्वारा तीन पुस्तकें मंगाई जिसमे पहली मुन्नवर राणा द्वारा लिखी "मोहजिरनामा." इस किताब की कुछ जंद लाइने पेश करता हूँ; अच्छी लगे तो दाद दीजियेगा नहीं तो शारीर का कोई अंग पकड़कर खुजला लीजियेगा, क्योंकि फिर आपसे इससे ज्यादा की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है.
एक जगह राणा साहब लिखते हैं:
मुहाजिर हैं मगर हम एक दुनिया छोड़ आयें हैं
तुम्हारे पास जितना है हम उतना छोड़ आयें हैं.
अगली जगह लिखते हैं:
हमारी अहलिया तो आ गयीं माँ छुट गयी आखिर
की हम पीतल उठा लाये हैं सोना छोड़ आये हैं.
हिंदी में अहलिया का अर्थ होता है पत्नी (वाइफ). ये दोनों एवं कई और शेर कराची और हैदराबाद (पाकिस्तान ) में मुशायरे के दौरान सुनाये थे. यदि आपको मौका मिले तो ज़रूर पढियेगा. काफी अच्छी है. कीमत मात्र १०० रुपये है. खरीद कर पढियेगा पर पाईरातेद कभी नहीं. Piracy का अधिकांश पैसा आतंकवाद को मदद पहुँचाने के लिए किया जाता है.
दूसरी जो किताब शर्मा जी ने मंगाई उसे लोकप्रिय अंग्रेजी साहित्य में एपिक का दर्जा प्राप्त है. जी हाँ मैं "Godfather ' की बात कर रहा हूँ. इन्होने इस किताब को पढने के लिया ऑफिस से बहाना बनाकर छुट्टी ली, घर पर पत्नी से वादविवाद किया, यंहा तक की बच्चों की फ़रियाद तक नहीं सुनी और मात्र एक दिन में पूरी किताब पढ़ डाली. पिचले कई दिनों से ये केवल Don, सन्नी, लुका ब्रसी, और माइकेल की ही बातें कर रहे है.
शर्मा जी ने एक तीसरी किताब भी मंगाई थी जिसके बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है. बहुत पूछने पर उन्होंने मुझे बताया की ये किताब उनके किसी पुराने मित्र ने लिखी है. बाद में उनसे ये जानने की कोशिश की की उन्होंने ये किताब पढ़ी या नहीं, तो उनका हलके शब्दों में जवाब आया की, "नहीं अभी नहीं पढ़ी है, फुर्सत मिलेगी तो पढ़ लूँगा." मेरे लिए यह जवाब हतप्रभ कर देने वाला था.
मैं पूछा, "पर आपको किताब पढने के लिए फुर्सत...क्या आपको किताब अच्छी नहीं लगी?" शर्मा जी ने मोनालिसा के बाप की तरह मुस्कुराते हुए कहा, "नहीं ठीक है, पर वो बात नही है. इसे ज्यादा से ज्यादा एक प्लाट की संज्ञा दी जा सकती है जिसपर आधारित हो कर एक अच्छी कहनी गढ़ी जा सकती थी."
फिर शर्मा ही ने कुछ ऐसी बातें कही जिसने मुझे चौंका दिया. क्योंकि मुझे उम्मीद नहीं थी की शर्मा जी कभी ऐसा भी बोल सकते है. उन्होंने चेहरे पर श्रेष्ठता का भाव लेट हुए कहा, "आज जिसे अक्षर ज्ञान है वो राइटर बन गया है, जिसे एक लकीर भी खींचनी नहीं आती वो designer और जिसके गले से स्वर भी नहीं फूटते वो गायक बन गया है. Technology ने हर कुछ संभव कर दिया है. अब फरहान अख्तर को ही लो; अपनी हर फिल्म में गाता है. एक लाइव प्रोग्राम में मनीष पाल ने फरहान अख्तर से गाना गाने की गुजारिश कर दी...अब क्या था, फरहान बिना सुर के गाने गाने लगे! अब ये भी तो technology का ही कामल है." मैंने मौन रह कर उनकी हर बातों में हामी भर दी. लेकिन शर्मा जी अब यंही रुकनेवाले थे. वो तो चल पड़े थे...बस. और अंत में हथौड़ा चलाया और हमें एक दोहा याद कराया.
रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आयेगा
.....................................................................
मैं आशा करता हूँ की आपको इस दोहे की अगली लाइन याद होगी. इसे अपने मन में अवश्य दोहरईयेगा.
जैसा की आप जानते हैं शर्मा जी किसी भी प्रकार की फिल्में देख सकतें है. लेकिन इनकी एक और अभिरुचि के बारे में बताना तो भूल ही गया था. इनके अन्दर एक बहुत ही अच्छा गुण है. इन्हें किताबें पढने का शौक है. यह किसी भी प्रकार की किताब पढ़ लेते हैं -- जीवनी, व्यंग, आलोचना, समालोचना, समीक्षा, लघु कथाएँ, उपन्यास, अनुवादित पुस्तकें, रोमांस, कॉमिक्स, बाल चित्रकथा, इत्यादि इत्यादि. पढने के मामले में इनकी स्थिति कुछ वैसी ही है जैसे की अंतोन शेखोव द्वारा लिखित लघु कथा "द बेट" के प्रोतागोनिस्ट की थी जिसने
अपने १५ साल के स्वैक्षिक कारावास के आखरी ९ साल किताबें पढ़ते हुई गुजारी थी. जब भी मौका मिला जंहा भी मौका मिला खोल के बैठ गए. इनकी रुचियों का क्षेत्र बहुत व्यापक है. महिलायों की पत्रिका में छपने वाले स्तम्भ "व्यक्तिगत समस्याएं" को बहुत चाव से पढ़ते हैं; मनो उनकी सारी समस्याओं का निदान इनके पास होगा. इन्होने कई लोगों को पढ़ उन्हें विद्वानों की श्रेणी में ला खड़ा किया है; उसमे से प्रमुख है -- तोल्स्तोय, रोंमा रोलां, दुर्खिम, टैगोरे, शरतचंद, प्रेमचंद, नोंम चोमस्की, एरिक होब्स्बौं, नस्सिम निकोलस तालेब, इत्यादि इत्यादि. शायद साइंस फिक्सन और स्कूल के दिनों में अपनी कोर्स बुक के अलावा इन्होने संभवतः हर कुछ पढ़ रखा है.
हाल ही के दिनों में शर्मा जी ने ऑनलाइन शौपिंग के द्वारा तीन पुस्तकें मंगाई जिसमे पहली मुन्नवर राणा द्वारा लिखी "मोहजिरनामा." इस किताब की कुछ जंद लाइने पेश करता हूँ; अच्छी लगे तो दाद दीजियेगा नहीं तो शारीर का कोई अंग पकड़कर खुजला लीजियेगा, क्योंकि फिर आपसे इससे ज्यादा की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है.
एक जगह राणा साहब लिखते हैं:
मुहाजिर हैं मगर हम एक दुनिया छोड़ आयें हैं
तुम्हारे पास जितना है हम उतना छोड़ आयें हैं.
अगली जगह लिखते हैं:
हमारी अहलिया तो आ गयीं माँ छुट गयी आखिर
की हम पीतल उठा लाये हैं सोना छोड़ आये हैं.
हिंदी में अहलिया का अर्थ होता है पत्नी (वाइफ). ये दोनों एवं कई और शेर कराची और हैदराबाद (पाकिस्तान ) में मुशायरे के दौरान सुनाये थे. यदि आपको मौका मिले तो ज़रूर पढियेगा. काफी अच्छी है. कीमत मात्र १०० रुपये है. खरीद कर पढियेगा पर पाईरातेद कभी नहीं. Piracy का अधिकांश पैसा आतंकवाद को मदद पहुँचाने के लिए किया जाता है.
दूसरी जो किताब शर्मा जी ने मंगाई उसे लोकप्रिय अंग्रेजी साहित्य में एपिक का दर्जा प्राप्त है. जी हाँ मैं "Godfather ' की बात कर रहा हूँ. इन्होने इस किताब को पढने के लिया ऑफिस से बहाना बनाकर छुट्टी ली, घर पर पत्नी से वादविवाद किया, यंहा तक की बच्चों की फ़रियाद तक नहीं सुनी और मात्र एक दिन में पूरी किताब पढ़ डाली. पिचले कई दिनों से ये केवल Don, सन्नी, लुका ब्रसी, और माइकेल की ही बातें कर रहे है.
शर्मा जी ने एक तीसरी किताब भी मंगाई थी जिसके बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है. बहुत पूछने पर उन्होंने मुझे बताया की ये किताब उनके किसी पुराने मित्र ने लिखी है. बाद में उनसे ये जानने की कोशिश की की उन्होंने ये किताब पढ़ी या नहीं, तो उनका हलके शब्दों में जवाब आया की, "नहीं अभी नहीं पढ़ी है, फुर्सत मिलेगी तो पढ़ लूँगा." मेरे लिए यह जवाब हतप्रभ कर देने वाला था.
मैं पूछा, "पर आपको किताब पढने के लिए फुर्सत...क्या आपको किताब अच्छी नहीं लगी?" शर्मा जी ने मोनालिसा के बाप की तरह मुस्कुराते हुए कहा, "नहीं ठीक है, पर वो बात नही है. इसे ज्यादा से ज्यादा एक प्लाट की संज्ञा दी जा सकती है जिसपर आधारित हो कर एक अच्छी कहनी गढ़ी जा सकती थी."
फिर शर्मा ही ने कुछ ऐसी बातें कही जिसने मुझे चौंका दिया. क्योंकि मुझे उम्मीद नहीं थी की शर्मा जी कभी ऐसा भी बोल सकते है. उन्होंने चेहरे पर श्रेष्ठता का भाव लेट हुए कहा, "आज जिसे अक्षर ज्ञान है वो राइटर बन गया है, जिसे एक लकीर भी खींचनी नहीं आती वो designer और जिसके गले से स्वर भी नहीं फूटते वो गायक बन गया है. Technology ने हर कुछ संभव कर दिया है. अब फरहान अख्तर को ही लो; अपनी हर फिल्म में गाता है. एक लाइव प्रोग्राम में मनीष पाल ने फरहान अख्तर से गाना गाने की गुजारिश कर दी...अब क्या था, फरहान बिना सुर के गाने गाने लगे! अब ये भी तो technology का ही कामल है." मैंने मौन रह कर उनकी हर बातों में हामी भर दी. लेकिन शर्मा जी अब यंही रुकनेवाले थे. वो तो चल पड़े थे...बस. और अंत में हथौड़ा चलाया और हमें एक दोहा याद कराया.
रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आयेगा
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मैं आशा करता हूँ की आपको इस दोहे की अगली लाइन याद होगी. इसे अपने मन में अवश्य दोहरईयेगा.
Bahut hi Umda hai... Sharmaji ka Pustak Prem to aisa hai ki Raat mein bhi uth kar baith jaate hain padhne ke liye..
ReplyDeletelajawaab...ab sharma ji ke prem ki baat hi na karein to behtar hoga, waise bhi sari hadein paar kar leta hai!
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